Friday, 29 December 2017

Monday, 13 November 2017

हल्दी (Turmeric )


परिचय
रसोई घर में प्रयोग होने वाले मशालों में हल्दी अपना विशिष्ट स्थान रखती है ।यह कन्द रूप में पाई जाती है । जीवन में इसका बहुत ही उपयोग बताया गया है । हल्दी के बिना कोई भी मांगलिक कार्य नहीं होते है । हिन्दू धर्म में हल्दी को शादी विवाह में बहुत ही महत्व दिया जाता है । कई कार्यक्रम तो हल्दी के नाम से ही जाने जाते है जैसे हल्दी बान ।

सौंदर्य प्रसाधनो में भी इसका प्रयोग किया जाता है । उबटन बनाने , फेस पैक बनाने आदि में यह प्रयोग की जाती है ।

मशाले के अलावा कच्ची हल्दी की सब्जी भी बनाई जाती है । जब तेज सर्दी पड़ती है तब मारवाड़ राजस्थान में हल्दी की गोठ बहुत ही फेमस रहती है । जिसमे हल्दी की सब्जी और मक्की की रोटी का संयोग बहुत ही आनन्द प्रदान करने वाला होता हैं ।

हल्दी की कई प्रकार की होती है जिनमे चार प्रकार की हल्दी अलग अलग नाम और काम से जानी जाती है ।

1 सामान्य हल्दी :- यह हल्दी मशाले के रूप में काम में आती है जोकि प्रत्येक घर में मिल जाती है ।

2 आमाहल्दी :- इसके कंद और पत्तो में कपुर मिश्रित आम की खुश्बू आती है । इसलिए इसे आमाहल्दी ( mango ginger) कहते है ।

3. जंगली हल्दी :- यह बंगाल में पाई जाती है । यह रँगने के काम आती है ।

4 दारुहल्दी :- यह सामान्य हल्दी के समान गुण वाली होती है । इसके क्वाथ में बराबर का दूध डालकर पकाते है । जब वह चतुर्थांश रहकर गाढ़ा हो जाता है तब उसे उतार लेते है । इसी को रसांजन या रसौत कहते है । यह नेत्रो के लिए परम हितकारी है ।

आयुर्वेदीय उपयोग :-

आयुर्वेद के ग्रन्थों के अनुसार यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण औषधी है । यह उष्ण वीर्य होती है । जिसके कारण यह कफवात शामक , पित्त रेचक, तथा वेदना स्थापन है ।
प्रमेह के लिए यह श्रेठ दवा है ।
यह रूचि वर्धक एवं रक्त स्तंभक है ।
इसका प्रयोग रक्त विकार , कफ विकार, अतिसार, जुखाम, डाइबिटीज, और चर्मरोग में भी किया जाता है ।

Wednesday, 4 October 2017

डर ( FEAR ) लगना क्या कोई रोग है ?

हम रोज एक बात सुनते है "डर के आगे जीत है" यानि जीत हासिल करने के लिए डर से पार जाना पड़ेगा । अब विचार इस बात का है कि क्या डर अपने शारीरिक और मानसिक विकास में बाधक है ? क्या हम इस डर के कारण आगे नही बढ़ पा रहे है ? क्या यह डर कोई रोग है ? यह बाते रोज दिमाग में आती है । सभी लोगो के दिमाग में आती होंगी । क्योकि संसार में ऐसा कोई विरला ही होगा जिसे डर नही लगता होगा । भय लगना यानि डर लगना एक आम बात है । इस संसार में बहुत ही कम लोग होंगे जिन्हें डर नही लगता है ।


क्या है डर ?
डर एक प्रकार का मानसिक रोग है यह मन में उठने वाली तरंग है । इसे भय भी कहते है । भय से पूरा शरीर पसीने पसीने हो जाता है । हाथ पैर कांपने लगते है । या सुन्न पड़ जाते है । सभी लोग डरते है , किसी किसी को डर के मारे पेसाब निकल जाता है । कई लोग बिस्तर में भी पिसाब कर देते है ।
किस बात से लगता है डर ?
यह डर प्रत्येक व्यक्ति में अलग अलग हो सकता है । किसी किसी को कई प्रकार से डर लगता है । कभी व्यक्ति भविष्य से डरता है । कभी अकेलेपन का डर लगता है । कभी अस्थिरता का डर सताता रहता है । मन में कोई ना कोई डर छाया ही रहता है । कोई कुछ कह देगा , लोग क्या कहेंगे, कभी बीमार ना हो जाऊं, किसी से झगड़ा ना हो जाये , किसी गलती के कारण पकड़ा न जाऊ , इनकम टैक्स , आदि बहुत से विचार सारे दिन आते ही रहते है । भूत - प्रेत का भी डर लगता है । बदनामी, गरीबी, आतंक, हारने का डर, जीत को बरक़रार रखने का डर । बहुत प्रकार के डर है जो हमे परेशान करते है ।
डर क्यों लगता है ?
आयुर्वेद ग्रंथो में मानसिक रोगों का कारण रज और तम गुण को माना है । जब शरीर में सत्व गुण की कमी हो जाती है तब शरीर में यह भय रूपी रोग उत्पन्न  होता है । भगवान श्री कृष्ण ने गीता में भी कहा है "निर्भयम सत्त्वं संशुद्धि" अर्थात जब शरीर में सत्व की प्रबलता हो जाती है तो मनुष्य निर्भय (भय हीन, डर रहित) हो जाता है । इसलिए यह कहा जा सकता है कि रजोगुण, और तमोगुण इस रोग के कारण है । जब भय प्रारम्भ होता है जिससे वायु और पित्त की वृद्दि हो जाती है जिससे पसीने छूटना और घबराहट होना आदि लक्षण दिखाई देते है ।
एक कारण यह हो सकता है कि हमारे अंदर बैठे परमात्मा को जब हम भूल जाते है ।तो वह एक संदेश देता है कि आप कुछ गलत कर रहे हो । जिस प्रकार मोबाईल लेपटॉप आदि यंत्र सन्देश देते है जब हम कुछ गलत बटन दबा देते है तो you are doing some thing wrong. मतलब आप कुछ गलत कर रहे है । बिलकुल इसी तरह हमारे शरीर रूपी इस यंत्र में जब कुछ गलत होता है तो भय लगता है ।
हम गलत मार्ग पर चलते है तो दिल धड़क उठता है । भय उत्पन्न होने लगता है । कुछ शारिरिक या मानसिक गलतियां करते है तो भय उत्पन्न होने लगता है ।
गलत नहीं करते तो भय नही लगता है । ज्ञान के अभाव में डर लगता है । अंधकार ही भय उत्पन्न करता है । तीन शारीरिक दोष वात, पित्त, और कफ । दो मानसिक दोष रज और तम ये ही  रोग कारक है । सत्व से कभी भी रोग नही होता है ।
डर से कैसे बचें ? उपाय :-
हम ऐसा क्या करे कि डर ना लगे ? इस सवाल के जबाव में यही कहा जा सकता है कि अपने शरीर में सत्व गुण की प्रबलता विकसित करनी चाहिए ।
गलत काम करने से अपने आपको बचाना चाहिए ।
सत्संग को बढ़ाना चाहिए ।
प्रकृति और परमात्मा पर भरोसा रखना चाहिए ।

Saturday, 30 September 2017

पाईल्स की दवा :- अगस्त्य हरीतकी

परिचय :-

यह हरड़ के द्वारा बनाई गई एक बहुत ही महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक औषधि है । जैसा कि हम जानते है हरड़ शरीर में कभी भी कोई साइड इफेक्ट नही करता है और जो शरीर में  विजातीय द्रव्य (कीटोन बॉडी)  होते है उन्हें बाहर निकाल कर शरीर के प्रत्येक अंग की क्रियाशीलता को व्यवस्थित करता है।

औषध द्रव्य :-

(1)मुख्य द्रव्य :-

बड़ी हरड़ 100 नग, जौ चार सेर, दशमूल सवा सेर, चित्रक, पिपला मूल, अपामार्ग, कपूर, कौंच के बीज, शंख पुष्पी, भारंगी, गज पीपल, खरैटी और पुष्कर मूल, प्रत्येक 10 - 10 तोला,

(2)अन्य द्रव्य :-

घृत 40 तोला, तेल 40 तोला, गुड़ सवा छः सेर ।

(3) प्रक्षेप द्रव्य :-

मधु 40 तोला, पिपली चूर्ण 20 तोला ।

बनाने की विधि :-

अगस्त्य हरीतकी नाम से यह दवा बाजार में आयुर्वेदिक स्टोर्स पर आराम से मिल जाती है । फिर भी जिन लोगो को घर पर ही यह दवा बनानी हो तो उनके लिए यह विधि शास्त्रों में बताई गई है ।

बड़ी हरड़ (हरीतकी) और जौ को एक पोटली में बांधे, और बाक़ी द्रव्यों को मिलाकर अधकुटा करके एक मन(लगभग 40 लीटर)  पानी में पकावे, तथा इसी में उक्त पोटली रख दें ।

जब हरड़ और जौ उबल जाये तथा क्वाथ तैयार हो जाए तो उतार ले । इस क्वाथ को छान कर इसमें उबाली हुई हरीतकी को मिलावे । फिर इसमें घृत और तेल 40-40 तोला तथा गुड़ सवा सेर पकावें ।

अवलेह सिद्ध होने पर या ठंडा होने पर मधु (शहद) 40 तोला और पिपली चूर्ण 20 तोला मिलाकर सुरक्षित रख लें ।

गुण और उपयोग :-

इसके सेवन से पाईल्स(अर्श), दमा(अस्थमा), क्षय(टी बी), खांसी, ज्वर, अरुचि, आदि रोगों का नाश करती है । कफ का नाश करने वाली होने के कारण दमा, खांसी, श्वास, यक्ष्मा,आदि में बहुत लाभ करती है ।

पाईल्स में है विशेष उपयोगी :-

अगस्त्य हरीतकी मृदु विरेचक है , इसलिए अर्श (बवासीर, पाईल्स) वाले को विशेष लाभ करती है । पाईल्स रोग अमूमन कब्ज होने से होता है और अगस्त्य हरीतकी विरेचक औषधि है यह कब्ज को दूर कर देती है । यदि ज्यादा कब्ज हो तो गर्म जल के साथ सेवन करने से एक दो दस्त साफ़ हो जाते है । इससे न तो पेट में मरोड़ होती है और न ही किसी प्रकार की तकलीफ होती है । अधिक दिनों तक इसका सेवन करने से किसी भी प्रकार की कोई तकलीफ और साइड इफेक्ट नही होते है । इसका सेवन लगभग दो से तीन माह तक करना चाहिए । यह अपना पूर्ण असर लगातार लम्बे समय तक लेने से ही स्थाई दिखा पाती है ।

सावधानियां :-

यह बहुत ही अच्छी और महत्वपूर्ण औषधि है और इसका कोई भी साइड इफेक्ट नही होता है , फिर भी यदि कोई अन्य रोग से ग्रसित व्यक्ति यह दवा लेता है तो उसे अपने चिकित्सक से परामर्श लेकर ही यह दवा लेनी चाहिए ।