Wednesday, 9 March 2016

जुकाम का घरेलू उपचार ---

जुकाम का घरेलू  उपचार ---


किसी किसी आदमी  या औरत को जुकाम होने की आदत सी पड जाती है बराबर सर्दी बनी ही रहती है नया कफ बनता ही रहता है और नाक बराबर बह्ती  ही रहती है कई लोगोको मौसम परिवर्तन होते ही जुकाम जकड लेती है ऐसी अवस्था मे इस चुर्ण के सेवन से काफी लाभ होता है  बसंत ऋतु मे भी कफ का प्रकोप होता है और ऋतु भी परिवर्तित होती है अतः यह चुर्ण सब के लियेबहुत हीलाभ पहुचाने वाला हो सकता है


द्रव्य – 
   
जायफल , लौंग , छोटी इलायाची , तेजपत्ता,दालचीनी , नागकेशर,कपूर , सफेदचंदन , धोये हुये काले तिल , वंशलोचन,तगर, आंवला, तालीस पत्र, पीपल, हरड , चित्रकछाल , सौंठ , वायविडंग , मिर्च और कलोंजी,


विधि –

 प्रत्येक द्रव्य को समभाग लेकर पीस कर कपडछान चुर्ण तैयार करे, जितना चुर्ण हो उसकेबराबर धुली हुई शुद्धकी हुई भांग का चुर्ण मिला दे, फिर सब चुर्णके समान भाग मिश्री पीस कर मिला कर रख ले ,


मात्रा और अनुपान –

 250 ग्राम  से 500 ग्राम तक सुबह शाम पानी से ले,  बच्चो को ना दे,

लाभ –

 इसके सेवन से आदतन जुकाम निश्चित रूप से ठीक हो जाती है


सलाह—

यदि दवा की मात्रा से कम असर हो रहा हो तो चिकित्सक के परामर्श से दवा की मात्रा  बढा सकते है और यदि दवा लेने से नशा होता हो तो मात्रा कम कर लेनी चाहिये  

Sunday, 6 March 2016

आयुर्वेद चिकित्सक है – भगवान शंकर !

आयुर्वेद चिकित्सक है – भगवान शंकर  !

भगवान शंकर को महादेव,देवो के देव, चिकित्सको के चिकित्सक, “भिषगानाम भिषक” आदि कई नामो से जाना जाता है प्रत्येक आयुर्वेद चिकित्सक  रसायन बनाने से पुर्व, औषध निर्माण से पहले महादेव का ही स्मरण करता है

“या ते रुद्र शिवा तनू  शिवा विश्वस्य भेषजी , शिवा रुद्रस्य भेषजी तया नो मृड जीवसे”

शिवा हरितकी का भी नाम  है और शिवा अर्थात हरितकी के लिये लिखा गया है कि यदि घर मे माँ नही हो और हरितकी हो तो चिंता ना करे क्योकि शिवा शिव के समान तथा माँ के समान कल्याण कारि है,
  
भगवान शंकर दयालू मे दयालू  और चिकित्सको मे चिकित्सक है –“ भिषक्तमँ त्वा भिषजाँ श्रृणोमि” , (ऋक. 2/33/4)

इनके भेषज अतिशय सुखकर होते है यजमान वेद मंत्रो के द्वारा उन भिषजो की याचना करते है –“हे रुद्र ! आप मुझे जो औषधि देंगे, उससे हम सैकडो वर्ष सुखमय जीवन व्यतीत करेंगे”

भगवान शंकर का आयुर्वेद से बडा ही गहरा सम्बंध है , पहला तो जहाँ महादेव विराजते है कैलाश पर्वत पर   वहाँ पर अनेक जडी बुँटिया भी विराजति है अर्थात उत्पन्न होतीहै ,भगवान शंकर के शुक्र को आयुर्वेद ग्रंथो मे पारा माना गया है तथा महादेवी पार्वति के  रज को गंधक माना जाता है और पारद(पारा) और गंधक को मिलाकर  सैकडो प्रकार की आयुर्वेदिक दवा बनाई जाती है और उन निर्मित औषधियो को  “रस”  कहा जाता है जो चिकित्सा कार्य मे बहुत ही काम आती है ,

भगवान शंकर का आयुर्वेद की उत्पति मे क्या हाथ था तो इसके लिये लिखा है
“मृत संजीवनी नाम विध्या या मम निर्मला , तपो बलेन महता मयैव परिनिर्मिता” ,

भगवान शंकर के पास मृत संजीवनी नामकी एक ऐसी विध्या थी जो किसी के पास भी नही थी इस विध्या से मरे हुये प्राणियो को जीवित किया जा सकता था इस विध्याको भगवान शंकर ने शुक्राचार्य को दिया था
भगवान शंकर ने शुक्राचार्य को पढाकर इस मृत संजीवनी विध्या की परम्परा को चालु रखा था

भगवान शंकर के बारे मे शल्य चिकित्सा के भी बहुत उदाहरण जुडे हुये है प्रथम पुज्य श्री गनेश जी का सिर हाथी का लगाना और दक्षप्रजापति के सिर को काटने के बाद पुनः बकरे का सिर लगा दिया था ऐसे कई बातो से ऐसा लगता है कि महादेव शंकर आयुर्वेद के महान चिकित्सक थे और अभी भी चिकित्सक जगत के लिये बहुत ही आदरणीय और प्रेरणा स्रोत है

आज इस महा शिवरात्री पर हम सब पुर्ण मनो योग से अपने प्रेरणा देने वाले महादेव को याद करे और उनका पुजन बहुत ही श्रद्धा के साथ करे – ओम नमः शिवाय ....


Wednesday, 27 January 2016

यौनशक्ति(sex power) वर्धक औषधि-- वीर्य स्तम्भन वटी

                            आजकल युवको मे शरीर सौष्ठव
को बढाने की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन यह शरीर सौष्ठव तब तक तो ठीक है जब तक इसका दुरोपयोग नही होता हो लेकिन आज का युवा जिम मे जाकर शरीर तो बलवान बना लेता है लेकिन मानसिक रूप से निर्बल ही रहता  है, जब मन पुर्ण रूपसे परिपक्व ना हो तो कई प्रकार की व्याधियाँ घेर लेती है,

                         यौन शक्ति का कम होना भी एक मानसिक बिमारी ही है इसमे कई कारण हो सकते है,जिस प्रकार से आजकल वातावरण बन रहा है जिसमे ये कारण विशेष है  जैसे- अनियमित दिनचर्या, अनुचित आहार-विहार, कामुक मानसिकता, अप्राकृतिक यौनक्रिडा, हस्त मैथून, पोषक आहार का अभाव, अश्लील वातावरण, आदि कारणो और मानसिक रुग्णता के कारण युवक अपनी यौनशक्ति को खो बैठते है


                        जब शक्ति नही रहती तो कुछ भी वश मे नही रहता है और यौनदोर्बल्य, स्वप्नदौष, धातु क्षीणता, आदि बिमारियो से पिडित हो जाते है और जब शादी होती है तो बडे  ही परेशान होते है, मेरी प्रेक्टिस मे बहुत से नवयुवको ने मुझसे सलाह लेकर अपना वैवाहिक जीवन सुखद बनाया है और अभी भी सलाह लेते रहते है , लेकिन जब किसी  किसी को  उचित परामर्श नही मिलता है तो वे आत्महत्या जैसे संगीन काम को भी अंजाम दे देते है,

                        यह आयुर्वेदिक औषधि इसी प्रकार  के शर्मिले युवको के लिये है जो अपना कष्ट किसी से शेयर नही करते या जिन्हे उचित सलाह नही मिल पाती वे लोग इस दवा का उपयोग कर सकते है


घटक द्रव्य --         सोने के वर्क, और कस्तुरी                 1--1ग्राम
                             चांदी के वर्क, इलायची, जुंदे बेदस्तर  10---10ग्राम
                             नरकपूर, दरूनज अकबरी, बहमन लाल, बहमन सफेद, जटामांसी, लौंग, तेजपत्र,(कपड -छान किया हुआ चुर्ण ले ) 5---5ग्राम
                             पीपल और सौंठ काचुर्ण 3----3ग्राम 
                             थोडा सा शहद


निर्माण विधि --

                       जुंदे बेदस्तर को शहद मे घोंटे, फिर वर्क कस्तुरी आदि अन्य द्रव्य मिलाते जाऐ, और घुटाई करते रहे, फिर नरकचूर आदि का बारीक पिसा छना हुआ चुर्ण मिलाते हुये घुटाई करते रहे, तीन घंटे घुटाई करने के बाद आधा--आधा ग्राम की गोलियाँ  बना ले ,


मात्रा एवम सेवन विधि --
  
                         2-- 2 गोली सुबह शाम मीठे गुनगुने दुध के साथ सेवन करे


लाभ --

                         इस वटी के सेवन से वीर्य शुद्ध और गाढा होता है, पाचन क्रिया सुधरती है, जठराग्नि प्रबल होती है शरीर सुन्दर और पुष्ट बनता है  शरीर शक्तिशाली बनता है


                        यह दवा विवाहित युवको के लिये ही है, जिनका विवाह नही हुआ है ऐसे नवयुवको को यौनवर्धक औषधियो का सेवन नही करना चाहिये

चिकित्सा कार्य एक सेवाकार्य है....

                    मुझे चिकित्सा करते हुये करीब अठारह वर्ष हो गये है,मुझे इस समयावधि मे कई प्रकार के अनुभव हुये है,मै इतना व्यस्त चिकित्सक नही हुँ जितना और मेरे कई साथी रहते  है,लेकिन इतना तो मेरे अनुभवो से मुझे पता चला ही है कि चिकित्सा एक सेवाकार्य है,आयुर्वेद मे इस कार्य के फल के लिये लिखा है - "किसी से मित्रता हो जाती है ,कोई धन दे जाता है, कोई दुआ दे जाता है और कोई कुछ भी ना दे तो धर्म तो होता ही है" अतः कहा गया है "चिकित्सा नास्ति निष्फला,"


                   मै मेरे मरीज के साथ बहुत ही मन और तन से साथ निभाता हुँ उसकी  पुरी सेवा करने की कौशीश करता हुँ, मेरी पुरी कौशीश रहती है कि वह पुरी तरह से जल्दी से ठीक और स्वस्थ हो जाये, जब वह आराम महशुस करता है तो मन मे एक संतोषप्रद खुसी महशूस होती है,


                  चिकित्सक को लोग भगवान का दर्जा देते है,और सच मे मानते भी है,चिकित्सक का कर्तव्य है कि वह भी भगवान बन कर ही रहे किसीके साथ भी छल प्रपंच ना करे धोका ना दे, रोगी के विश्वास को बनाये रखे, यदि किसी  मरीज के परिजन भावावेश मे कुछ गलत बोल भी दे तो उदारमन से उसे सहन करने का धीरज रखना चाहिये,


                    मेरे मरीजो को मुझसे भी बहुत शिकायते है,किसी को फीस लेने की शिकायत है तो किसी घर पर बुलाने पर ना आने की शिकायत है, किसी किसी को तो रेफर कर देने की ही शिकायत हो जाती है उन्हे लगता हैकि यदि गौर से देखते तो मरीज यही पर ठीक हो सकता था,लेकिन जहाँ तक मेरा मानना है,चिकित्सक भगवान के जैसा है लेकिन भगवान नही  है, वह भी एक इंसान है,एक पति है ,एक पिता है,चिकित्सक कभी भी किसी मरीज का बुरा नही सोच सकता, वह हर हालत मे उसे स्वस्थ करने के लिये तत्पर रहता है,


                     चिकित्सक यदि इस कार्य को सेवा कार्य समझ कर कर रहा है तो सभी मरीजो तथा परिजनोको भी इस कार्य को सेवा कार्य ही समझना चाहिये, सेवाकार्य को यदि सेवा लेने वाला अधिकार या हक समझने लग जाता है तो फिर झगडा होना स्वभाविक है, अतः सेवाकार्य को सेवा ही रहने दे अधिकार नही,

Sunday, 27 December 2015

स्त्रियो मे बांझपन(infertility) के लक्षण –

स्त्रियो मे बांझपन(infertility) के लक्षण –

1. मासिक धर्म ठीक प्रकार से नही होता है

2. गर्भ मार्ग मे बार बार सुईया सी चुभती है,साथ ही मीठा मीठा दर्द सा होता रहता है

3. विषय भोग करते हुये भी गर्भधारण नही होता है

4. बांझ स्त्री की कुचाये (स्तन) प्रायः बहुत ही कम उठी हुई होती है अथवा  बिलकुल  ही उठी हुई  नही होती है

5. गर्भ ग्रहण का मार्ग प्रायःशुष्क  होता है

6. दुर्बल स्त्री मे आर्तव प्रवाह  का पुर्ण तया अभाव रहता है


7. स्त्री के गर्भ मार्गमे जलन,खुजलाहट ,फुंसियाँ ,सुजन एवम सुई के समान चुभने जैसी पीडा की अनुभूति होती है 

श्वेतप्रदर (leacorrhoea) का उपचार--

             परिचय-- आयुर्वेद मे श्वेतप्रदर रोग को श्लेष्मज योनि व्यापद मे किया गया है,ऋतुकाल मे मिथ्या आहार-विहार से,अत्यंत मैथून से,उत्तेजक आहार सेवन से श्वेतप्रदर की उत्त्पति होती है,यह एक स्वतंत्र रोग है फिर भी यह रोग निम्न लिखित रोगो मे लक्षण के रूप मे दिखाई देता है,


                यह रोग कई रोगो के परिणाम स्वरूप होता है,विशेष रूपसे गर्भाशय,डिम्बग्रंथियो, गर्भाशयमुख, गर्भाशय का अपने स्थान से हटना, योनिमार्ग की सूजन, भीतरी जननेंद्रियो मे  फोडा -फुंसी, रसोली,आदि का होना, मुत्राशय की सुजन, सुजाक, आतसक, रक्ताल्पता, जिगर के रोग, गुर्दे के विकार,मधुमेह,मलावरोध,आदि रोगो के लक्षणो के  रूप मे यह रोग दिखाई देता है,यदि इन रोगो के कारण यह रोग हो तो किसी चिकित्सक के परामर्श से चिकित्सा करवाये,


                लक्षण- इस रोग मे रोगिणी की योनि से रात-दिन सफेदपानी या पीला पानी आता रहता है, जो लसदार होता है,योनि सदैव गिली रहती है,


                उपचार -- इस रोग की चिकित्सा रोगो के अनुसार आयुर्वेद ग्रंथो मे अलग अलग बताई है, यदि ऊपर बताये गये रोग ना होने पर भी यदि सफेद पानी की दिक्कत हो तो जो  चिकित्सा यहाँ पर  बताई जा रही है वह चिकित्सा करे , यदि रोग नया हो तथा प्रारम्भिक अवस्था मे हो तो इस उपचार को प्रयोग करे निश्चित रूप से आराम हो जायेगा


नुस्खा -- 

आम के फूल,सुपारी के फूल, पिस्ता के  फूल, ढाक का गौंद, छोटा गौखरू, प्रत्येक 12-12 ग्राम, इमली के बीज की गिरी 18 ग्राम , बकायन 9ग्राम, सफेद चंदन का चुर्ण 6ग्राम, मीठा इंद्र जौ 6ग्राम, सफेद मूसली 12ग्राम, अनार के फूल 12 ग्राम, सब औषधिया पृथक-पृथक पीसकर बंग भस्म 6ग्राम तथा खांड सब औषधियो के बराबर मिला कर रख ले,

मात्रा -- 6ग्राम औषधि पाव दूध के साथ प्रतिदिन खाना चाहिये 

Thursday, 17 December 2015

सर्दियो मे मिटाये दुबलापन ..



                   जब मै जवानी की दहलीज पर था तब मेरा वजन बहुत ही कम था लेकिन जैसे ही सर्दीया आई  मेरे अंदर एक जुनून सा छा गया था कि मुझे अपना वजन बढाना है और अपना दुबलापन दूर करना है और मै ने एक प्लान तैयार किया और उस प्लान को पुरी तरह से हकिकत बनाने के लिये पुरजोर कोशीश की और मै सफल भी हुआ  क्योकि यह ऋतु पुष्टिकारक है इस ऋतु मे भी यदि वजन बढा कर अपना दुबलापन नही मिटाया तो फिर अन्य ऋतुओ मे वजन बढाना और अपने आप को स्वस्थ रखना बडा ही कठीन कार्य है मै ने जो प्रयास किये उसका फल मुझे मिला और आज मेरा वजन पुरी तरह स्वस्थ होने की गवाही देता है , मेरी पुरी योजना और किस तरह मै ने उसको क्रियांवित किया उसकी पुरी हकिकत बता रहा हुँ,


                  (1) मन को करे तैयार – जब भी हम कोई काम करते है तो सबसे पहले हमारा मन उसे करने से रोकता है मन मे आलस्य के भाव आते है और वह रोकने लगता है बार बार उस काम के प्रति नकारात्मकता को लाने का काम मन ही करता है सबसे पहले मन मे उत्पन्न इस नकारात्मकता को समाप्त कर देना जरूरी है पहले दिन हीमन मे  पुरा  दृढ विस्वास बनाये कि मुझे यह काम अवस्य ही करना है मैं ने भी मेरे मन को पुरी तरह से तैयार किया और वजन बढाने के काम को दृढता से करने के लिये मन को तैयार किया ,


                    (2) व्यायाम करे शुरू – शरीर को मजबूत बनाने के लिये व्यायाम का बडा ही महत्व है व्यायाममे दौड लगाना, सुबह घुमने जाना, जिम मे जाना,घर पर ही योग- प्राणायाम करना, घर पर ही दंड बैठक आदि कसरत करना,इनमे से कोई भी एक दो सही सहज हो उनको चुन कर नियमित रूप से करे, व्यायाम मे सबसे सरल है घर पर ही रहा कर एक साफ स्वच्छ जगह पर थोडा उछल – कूद करके वार्म-अप करना, थोडी देर पुस-अप करना,उठक बैठक-करना , मैंढक चाल चलना,दस बीस प्रकारके सरल से योग करना जैसे- ताडासन, वृक्षासन, हस्तपादासन, उष्ट्रासन, त्रिकोणासन , सुर्यनमस्कार, वज्रासन,सुप्त्वज्रासन, आदि आसन करने अंत मे शवासन और अनुलोम विलोम प्राणायाम  करके  दस  पद्रह मिनिट  तक ध्यान लगा कर शरीर को सामान्य करले, मै ने इसी प्रकार शरीर को स्वस्थ बनाने के लिये व्यायाम शुरूकिया,


                    (3) भूख का रखे ध्यान – जब भी हम शरीर मजबूत बनाने की बात करते है तो आहार का बडा महत्व होता है,लेकिन आहार से पहले भी एक महत्वपुर्ण बात है वह है भूख लगना, यदि हमे सही समय पर भूख नही लगती या भूख लगती ही नही हो तो इसका पुरा निराकरण करना बहुत ही जरूरी होता है इसके लिये आयुर्वेद मे अग्नि वर्धक औषधिया होती  है उनका सेवन किया जा सकता है किसी योग्य आयुर्वेद चिकित्सक के परामर्श से यह दवा लेकर भूख बढाई जा सकती है, मै ने बहुत ही खोज करके एक आयुर्वेदिकऔषधि को भूख बढाने के लिये मेरे लिये तैयार किया था अब यह औषधी बहुत मरीजो को लाभ पहुचा चुकी है आप लोगो को या आपके किसी परिचित को  भी यदि भूख ना लगने की शिकायत है तो मुझे ईमैल कर सकते है –   घर बैठे यह दवा आप उचित मुल्य मे मंगवा सकते है यह बहुत ही कारगर दवा है इसका किसी भी प्रकार का कोई साईड इफेक्ट नही है यह पुर्ण रूप से आयुर्वेदिक औषधि है भूख बढाने मे तथा पेट साफ रखने की उत्तम औषधि है


                     (4) पौष्टिक आहार ले – आयुर्वेद मे लंघन और वृहंण आहार का वर्णन है जिस आहार से शरीर को दुबला पतला बनाना हो वह आहार लंघन आहार कहलाता  है और जिस आहार से शरीर को मोटा और मजबूत बनाया जाता है उसे वृहंण आहार कहते है, शरीर को पुष्ट करने के लिये जो आहार उचित है वह है – दूध, घी मलाई, फल, दाल, आदि हम इसको इस प्रकार भी कह सकते है कि प्रोटीन,  वसा, कार्बोहाईड्रेट, विटामिंस, मिनरल्स ये सब संतुलित रूप से ले तो यह हमारा शरीर पुष्ट और स्वस्थ हो सकता है


                      (5) पाचनक्रिया रखे मजबूत—हम जो आहार लेते है उसका उचितपाचनहो रहा है या नही हो रहा यह जानकारी हो  ना बहुत जरूरीहै  हम कई बार लोगो से सुनते है कि मै खाता तो बहुत हुँ लेकिन मेरे शरीर को लगता ही नही है जो खाता हुँ पता नही कहाँ जाता है, यह सब पाचन का ही खेल है,जो खा रहे है यदि वह बिना पचे ही गट्टर मे जा रहा है तो खाने का क्या फायदा,इसकेलिये यह ध्यान रखना जरूरी है कि पेट किस प्रकार से साफ हो रहा है यदि खाना खाते ही लेट्रीन जाना पडता है  तो पाचन क्रिया सही नही है यदि खाना खाने के बाद भी सुबह यदि पेट साफ नही हो रहा है तो भी पाचन क्रिया सही नही है,इस पाचन क्रिया को सही रखने के लिये भी आयुर्वेद मे बहुत औषधिया है जो आप लोगो को घर बैठे मिल सकती है आप सिर्फ ईमैल करे और अपनी परेशानी बताये, उचित परामर्श और उचित मुल्य मे दवा मिल जायेगी ,यदि आप मुझसे दवा नही मंगवाना चाहते है तो अपने किसी योग्य आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श लेकर दवा लेकर अपनी समस्या से निजात पा सकते है


सभी प्रकार से सारे प्रयास करके इस सर्दी की ऋतु मे अपना वजन अवस्य बढाये और दुबलापन मिटाये, इति